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तालिबान के पास कितना पैसा है ?🤔

तालिबान के पास कितना पैसा है। खैर rediculous के सवाल पर कि तालिबान दुनिया का सबसे अमीर इन सर्जन ग्रुप रिसेंटली सीआईए ने एक्सपोज की है कि तालिबान सिर्फ एक लोकल इन सोशल ग्रुप ने एक बहुत बड़ा फाइनैंशल नेटवर्क hai.

तालिबान की इनकम 400 मिलियन डॉलर से लेकर बिलियन डॉलर्स तक हो सकती है।ये पैसा आता कहां से और इससे हमें क्या फर्क पड़ता है।

तालिबान के इनकम सोर्स के बारे में जानेंगे जिनसे फ्यूचर की कुछ बातें हमारे लिए क्लियर हो जाएंगी।देखिए ये फैक्ट्स इम्पॉर्टेंट हैं लेकिन ये लोगों से छुपे हुए तो इन्हें और लोगों तक पहुंचाने में हमारी help hogi. Also ye इम्पॉर्टेंट टॉपिक्स को आसान भाषा में आपके सामने लाना हमारा मिशन है।

  1. तालिबान के इनकम के चार मेन सोर्सेस हैं जिनमें से कुछ आपके लिए काफी शॉकिंग हो सकते हैं। सबसे पहला सोर्स है ओपियम अफगानिस्तान दुनिया का लार्जेस्ट ओपियम बनाने वाला देश है ये इनोसेंस सा दिखने वाला फूल एक नॉट सो इनोसेंट सब्सटेंस को जन्म देता है जिसे हम कहते हैं हेरोइन दुनिया में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग हेरोइन एडिक्ट है। हेरोइन एक इललीगल ड्रग दौलत इललीगल हेरोइन इंडस्ट्री इस worth बिलियन यूएस डॉलर्स ओपियम से हेरोइन के अलावा काफी इम्पोर्टेड दवाएं बनती है मॉर्फिन जो पेन के सिग्नल को रोकने में मदद करती है।थोड़ा बहुत nahi दुनिया का 85% पोरषण ओपियम अफगानिस्तान से आता है डिमांड की बात की जाए तो रशिया और चाइना में हेरोइन की डिमांड दुनिया में सबसे ज्यादा सुना ये नौजवान 30 कंट्रीज से इंट्रेस्टेड इन अफगानिस्तान हर साल अफगानिस्तान 3 बिलियन डॉलर से ओपियम एक्सपोर्ट करके कमाता है जिसमें से 4 सौ मिलियन डॉलर्स तालिबान को जाता नंबर टू टैक्स कलेक्शन। ये तालिबान के अफगानिस्तान के कंप्लीट टेकओवर के पहले की बात Vox के इस विडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे अमेरिका जपान यूनाइटेड नेशंस ने मिलकर इस रिंग रोड को बनाने की कोशिश की लेकिन वो फेल हो गए क्योंकि 20 साल की कोशिशों के बाद भी ये रोड कंप्लीट नहीं हो पाया।
  2. अफगानिस्तान में तालिबान से ज्यादा अगर किसी चीज की प्रॉब्लम है तो फिर वो है कनेक्टिविटी की प्रॉब्लम काबुल जैसे बड़े शहरों से छोटे छोटे गांव काफी ज्यादा दूर। अगर कोई इमरजेंसी होती है तो शहर तक कैसे पहुंचे इस आइडिया के साथ एक रिंग रोड का आइडिया सामने है लेकिन तालिबान इस रोड के कई एरियाज को कंट्रोल करेगा और वहां से क्रॉस होने वाले फार्म हाउस और ट्रेडर्स से कुछ अमाउंट टैक्स के तौर पर लेता। उसी तरह रोज स्कूल इसके लिए एक्स्ट्रा अफगानिस्तान के लोगों के डेवलपमेंट के लिए बन रहे है। उनकी भलाई के लिए बन रहे थे उन पर भी तालिबान टैक्स चार्ज कर तक नई दुकानें बनने नहीं देता।अफगानिस्तान के इलेक्ट्रिक कंपनी के हेड ने बीबीसी को एक इंटरव्यू में कहा कि 2018 मैं उन्हें इलेक्ट्रिसिटी प्रोवाइड करने की परमिशन देने के बदले उनसे हर साल 2 मिलियन डॉलर्स टैक्स के तौर पर लिए जाते हैं यानी पिछले 20 सालों में हर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में तालिबान के डेवलपमेंट में भी जाने अनजाने में कुछ पैसे जोड़े |
  3. माइन्स एंड मिनरल्स अफगानिस्तान की माइनिंग इंडस्ट्री हर साल 1 बिलियन डॉलर्स का रेवेन्यू जेनरेट करती है। अफगानिस्तान की जमीन के नीचे ऐसा kya treasure chupa pada hai?लिथियम अफगानिस्तान में इतना लिथियम भरा पड़ा है कि यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस अफगानिस्तान को साउदी अरेबिया लिथियम कहकर अगला रेवोल्यूशन इलेक्ट्रिक व्हीकल रिवोल्यूशन होने वाला है। हम सब जानते हैं और लिथियम से उन cars की बैटरीज बनने वाली हैं। चाइना alredy EVs मदद से ग्लोबल सुपरपावर बनना चाहती है। हमें इस विडियो प्लेन के कॉपर अफगानिस्तान में टोटल सिक्स मिलियन टन का कॉपर है टू नेट में अफगानिस्तान में कॉपर माइनिंग का कॉन्ट्रैक्ट हमारे फ्रेंडली चाइना को मिला है।नैचरल गैस अफगानिस्तान में है। Lapislazuli ek काफी एक्सपेंसिव जैन स्टोन अफगानिस्तान में है 1.4 मिलियन टन के रेयर अर्थ मिनरल्स जो मिलिट्री इक्विपमेंट और हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स में यूज होते हैं। अफगानिस्तान की जमीन के नीचे इस इंडस्ट्री में कई लोग इलीगल involved अफगानिस्तान की पिछली गवर्मेंट ने खुद Admit के तालिबान ने बाय फोर्स कई माइनिंग साइट्स और लोकल माइनर्स के ऑपरेशंस को कंट्रोल करना शुरू कर दिया था। ऐसा ही 25 से 30 छोटे बड़े माइनिंग ऑपरेशंस पूरे देश में फैले हुए हैं जिन्हें इन डायरेक्टली तालिबान कंट्रोल करता है और उनसे हर साल तालिबान 10 मिलियन डॉलर्स कमाते। तालिबान का चौथा और सबसे शॉकिंग सोर्स ऑफ इनकम है फॉरन डोनेशन। ये डोनेशन कहां से आता है। अफगानिस्तान के गवर्मेंट और यूएस ऑफिशल्स ने भी कुछ देशों के नाम लिए। ये देश तालिबान को अक्सर फाइनैंशल ईयर दिया करते थे। इनमें पाकिस्तान इरान और रशिया का नाम शामिल था। इन्हें क्लासीफाइड रिपोर्ट में एक्सपोज किया था कि एक साल तालिबान को 106 मिलियन डॉलर्स फॉरन डोनेशन के तौर पर मिले। ये पैसे कहां से आए। सीआईए मानता है कि ये पैसा गल्फ देशों से अमेरिकन इंटेलिजेंस ऑफिसर्स कहते हैं कि पाकिस्तानी इंटेलिजेंस का तालिबान को फाइनैंशल एड देने में बहुत बड़ा हाथ hai प्लीज नोट ये सारे नंबर्स तालिबान के पावर में आने से पहले के हैं। अब तो तालिबान अफगानिस्तान को कंट्रोल करता है तो ये सारी चीजें जो पहले इललीगल और छुप छुप के हो रही थी अब ओपन लीगली और एक सिस्टमैटिक तरीके से होने वाली है और सोचने जैसी बात ये है कि क्यों दूसरे देशों के लोग इतना सारा पैसा तालिबान को दे रहे हैं जैसे टाइम गुजरता जाता है वैसे ही एक पजल के जैसे चीजें क्लियर होने लगती हैं।

तालिबान ने कहा है कि उन्हें कश्मीर के बारे में बात करने का हक चाइना और पाकिस्तान की बैंकिंग के साथ तालिबान कश्मीर में भी अपनी एक्सट्रीम आइडियोलॉजी फैला सकता है उसे भारत में भी ला सकें और ये बात जानते हुए हमें भारत की इंटेग्रिटी को संभालने की सख्त जरूरत है तो ये सारे फैक्ट्स लोगों तक पहुंचाने में हमारी हेल्प की Jisse इस विडियो ka परपज यह है कि आपको समझाना है कि तालिबान के अवतार को देखकर लगता है कि ये लोग सिर्फ और सिर्फ अफगानिस्तान के पॉलिटिक्स में इन्वॉल्व प्रबल हैं जो फौरन पावर से सिर्फ अफगानिस्तान की आजादी चाहते हैं लेकिन सच तो ये है कि तालिबान एक काफी कॉम्प्लेक्स फिनांशल नेटवर्क जो हंड्रेड मिलियन डॉलर्स अपने इलीगल ड्रग ट्रेड किडनैपिंग एक्सटॉर्शन और फॉरेन डोनेशन के जरिये कमाता नासर ये अफगानिस्तान में तालिबान पावर में आने के बाद टाइम होगा। इन सारे डोनेशन को पे बैक करने का जिन्होंने ये डोनेशन दिए हैं उन के इंट्रेस्ट सॉल्व का ऐसे टाइम पर सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम हमारे आस पास होने वाली इंफॉर्मेशन को पढ़ें समझें और सही इन्फॉर्मेशन और लोगो तक पहुंचाएं। see I know की लोगों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसमें इंटरटेनमेंट नहीं है गॉसिप नहीं कोई मसाला नहीं। लेकिन ये वीडियो उन 1% लोगों के लिए जिन्हें हमारी ही तरह फरक पड़ता।

फर्क पड़ता है।😎

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